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अब होगी ड्रोन से राजस्थान में खेती, किसानों को सरकार की ओर से मिलेगी 4 लाख की सब्सिडी

अब होगी ड्रोन से राजस्थान में खेती, किसानों को सरकार की ओर से मिलेगी 4 लाख की सब्सिडी

किसानों के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार कई प्रकार के योजनाओं का संचालन कर रही है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और कम से कम समय में कार्य हो. बजट घोषणा के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ड्रोन से खेती (Agriculture Drone) करने की योजना जारी की थी. इस योजना से 40 करोड़ रुपए तक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है. इस योजना के तहत यदि कोई भी कस्टम हायरिंग सेंटर ड्रोन को खरीदेगा तो सब्सिडी मिलेगी और फिर किसान उससे ड्रोन किराए पर ले सकते है. यदि किसान भी ड्रोन खरीदना चाहे तो खरीद सकता है. किसानों को इस योजना से काफी फायदा मिलेगा. वो काम कीमत पर ड्रोन खरीद या किराए पर ले सकते है.

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योजना से किसानों का फायदा

इस योजना से किसानों का कई प्रकार से फायदा होगा. जैसे- किसानों का समय बचेगा ड्रोन कम से कम समय में छिड़काव का काम कर देगा. यदि पुराने तरीके से इस काम को किया जाए तो बहुत समय लगेगा साथ ही बहुत मेहनत भी. यदि किसान 2-3 मजदूर लगाए तो बहुत खर्च भी हो जायेगा. जैसे- 1 मजदूर की कीमत 400 रुपए तो 3 मजदूर 1200 रुपए में आएंगे. जबकि ड्रोन सिर्फ 300 से 400 के बीच में आ जाएगा. ड्रोन से हर जगह बराबर का छिड़काव होगा जबकि मजदूर कही कम तो कही ज्यादा छिड़काव कर देंगे.

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10 मिनट में 1 एकड़ जमीन पर छिड़काव

कृषि में किसी फसल के उपज के लिए कई स्टेप होते है, जैसे- कटाई, सिंचाई और साथ - साथ कीटनाशक छिड़काव भी जरूरी है. यदि कीटनाशक का छिड़काव न किया जाए तो फसल बर्बाद हो सकती है. अभी के समय लोग कीटनाशक के छिड़काव के लिए पेटीनुमा चीज को कंधो में टांगकर स्प्रे के द्वारा छिड़काव करते है. 1 एकड़ जमीन के लिए अगर इस पेटीनुमा स्प्रे से छिड़काव किया जाए तो 3 से 4 घंटे लग सकते है. साथ ही कीटनाशक से छिड़काव करने वाले किसान के शरीर को भी बहुत नुकसान पहुंचता है. वही , ड्रोन से इतने ही क्षेत्र में छिड़काव किया जाए तो 10 मिनट में हो जाएगा और किसान के शरीर भी बचा रहेगा.  

इस राज्य में किसानों एवं खेतिहर मजदूरों को दुर्घटना की घड़ी में दिया जायेगा मुआवजा

इस राज्य में किसानों एवं खेतिहर मजदूरों को दुर्घटना की घड़ी में दिया जायेगा मुआवजा

राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना के जरिये कृषकों एवं खेतिहर मजदूरों को दुर्घटना में किसी तरह की शारिरिक रूप से हानि अथवा मृत्यु के समय 50,000 से 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। मौसमिक अनिश्चितताओं की वजह से खेती-किसानी एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होता जा रहा है। आए दिन फसलों में काफी हानि होती जा रही है, साथ ही कृषकों की भी आजीविका प्रभावित हो रही है। इसका नुकसान किसान परिवारों को भोगना पड़ता है। बहुत बार सुनने को मिलता है, कि कृषि मशीनरी चलाते वक्त अथवा मौसम की वजह से किसान की फसल नष्ट हो जाती हैं। ऐसे में अधिकाँश मामलों में किसान की मौत तक हो जाती है। ऐसी दुःख की घडी में किसान परिवारों की मदद हेतु बहुत सारे राज्यों में मुआवजा प्रदान किया जाता है। राजस्थान की सरकार भी इस परेशानी की घड़ी में किसानों के साथ खड़ी रहती है। राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना राज्य सरकार द्वारा चलाई है, इसके माध्यम से किसान व खेतिहर मजदूर के साथ दुर्घटना हुई हानि या मृत्यु के दौरान 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान किया जाता है। बीते 4 वर्ष में 10,000 से भी अधिक किसान राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना से फायदा उठा चुके हैं।

जानें राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना के बारे में

राजस्थान सरकार द्वारा किसानों के फायदे के लिए चलाई जा रही राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना के जरिये। खेती-किसानी करते समय दुर्घटनावश अंग-भंग होने अथवा मृत्यु होने की हालत में 2 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। अगर खेती के वक्त सिर पर चोट लगने, कोमा में जाने, दोनों हाथ, दोनों पैर, दोनो आंख, रीढ़ की हड्डी टूटने जैसी शारीरिक हानि होने की स्थिति में किसान या किसान परिवार को 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यदि किसान का एक अंग विकलांग होने की स्थिति में 25,000 रुपये, उंगली की हानि पर 5,000 रुपये, दोनों उंगली का नुकसान होने पर 10,000 रुपये एवं चार उंगलियों की हानि होने पर 20,000 रुपये दिए जाते हैं।


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10,000 कृषकों को प्राप्त हुई आर्थिक सहायता

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान सरकार द्वारा राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना के चलते बीते 4 साल में 10 हजार 237 कृषकों को मंडी समितियों के जरिए 151 करोड़ 92 लाख 3 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। इस योजना से 2018-2019 तक 989 कृषकों को 1381.98 लाख रुपये, 2019-2020 में 2,981 किसानों को 4,303.50 लाख रुपये, 2020-21 में 2,275 किसानों को 3,457.10 लाख रुपये, 2021-2022 में 2,806 किसानों को 4,227.10 लाख रुपये एवं 2022-23 सितंबर तक 1,186 किसानों को 1,822.35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।

आवेदन कहाँ करें किसान

सभी किसान और खेतिहर मजदूर वर्ग तक राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना का लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने ऑनलाइन साइट भी लॉन्च की है। इस योजना का लाभ केवल राजस्थान के किसानों को ही दिया जाता है, जिसमें आवेदन करने हेतु राज किसान साथी पोर्टल पर जन आधार व मोबाइल नंबर के जरिये से Apply किया जा सकता है।
Merikheti.com ने राजस्थान में फरवरी की मासिक किसान पंचायत का आयोजन किया

Merikheti.com ने राजस्थान में फरवरी की मासिक किसान पंचायत का आयोजन किया

Merikheti.com के द्वारा मासिक किसान पंचायत 12 फरवरी 2023 दिन रविवार को गाँव सीथल, जिला अलवर (राजस्थान) की जय हिन्द नर्सरी में आयोजित की गयी। मासिक किसान पंचायत के दौरान किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों एवं तकनीकों के बारे में बताया गया था। Merikheti.com द्वारा प्रत्येक माह किसान मासिक पंचायत का आयोजन किया जाता है। जिससे कि किसानों को वर्तमान में कृषि क्षेत्र में हुए परिवर्तन के बारे में बताया जा सके साथ ही उनकी आय में बढ़ोत्तरी करके उनको अच्छे ढंग से अपना जीवन यापन करने के लिए सक्षम बनाया जा सके। किसानों के हित में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान  भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के  वैज्ञानिक  मौजूद रहते हैं। किसान बेझिझक अपने सवाल पूछते हैं, जिनका उत्तर कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विशेषज्ञ  विस्तृत रूप में देते हैं। किसान मासिक पंचायत के दौरान डॉ सी.बी. सिंह प्रिंसिपल साइंटिस्ट (RETD) IARI , डॉ विपिन शर्मा कृषि वैज्ञानिक (KvK) G. B नगर और डॉ हरीश कुमार कृषि वैज्ञानिक PUSA (ICAR) सहित अन्य बहुत से कृषि क्षेत्र से जुड़े दिग्गज वैज्ञानिक उपस्थित रहे।  इस मासिक किसान पंचायत में वैज्ञानिकों ने  गाँव सीथल (भिवाड़ी ) के किसानों  को खेती की ऊपज बढ़ाने के लिए कई नुस्खों और तकनीकों के बारे में बताया। सीथल गाँव शुष्क इलाकों में आता है यहां खेती वर्षा पर ही आधारित है यहां के किसानों को बताते हुए वैज्ञानिकों ने कहा की  आप जैविक खेती को अपना कर भी अच्छी पैदावर ले सकते है। वैज्ञानिकों ने किसनो को संजीवक, जीवामृत बनाने की विधि के बारे में बताया। ये दोनों घोल बनाने की विधि निम्नलिखित है। 

संजीवक घोल को बनाने की विधि इस प्रकार है

संजीवक का उपयोग सूक्ष्मजीवों और त्वरित अवशेषों के अपघटन के साथ मिट्टी को समृद्ध करने के लिए उपयोग किया जाता है।  सबसे पहले आपको 500 लीटर  के बंद ड्रम में 300 लीटर पानी में 100-200 किलो गाय का गोबर, 100 लीटर गोमूत्र और 500 ग्राम गुड मिलाना है। इसके बाद इस ड्रम को बंद करके 10 दिनों के लिए गलने के लिए रख दे। 10 दिनों बाद ये संजीवक घोल बनकर तैयार हो जाता है। इसका प्रयोग 20 गुना पानी में घोलकर एक एकड़ में या तो मिट्टी के स्प्रे के रूप में या सिंचाई के पानी के साथ छिड़काव करें।संजीवक घोल का छिड़काव सिंचाई के पानी के माध्यम से उपयोग किया जाता है।  ये भी देखें: Merikheti.com ने की जनवरी की मासिक किसान पंचायत तीन बार इस  घोल का छिड़काव करने से फसल की ऊपज में बढ़ोतरी होती है, एक बुवाई से पहले, दूसरा बुवाई के बीस दिन बाद और तीसरा बुवाई के 45 दिन बाद।

जीवामृत बनाने की विधि

एक बैरल/ड्रम में 100 लीटर पानी लें और 10 किलो गाय का गोबर और 10 लीटर गोमूत्र में मिलाएं। इसके बाद  दो किलो गुड़ और दो किलो चना या कोई भी दाल का आटा इस घोल में  लकड़ी की डंडी से अच्छी तरह मिला लें। इस घोल को 5 से 7 दिन के लिए गलने के लिए रख दें। घोल को नियमित रूप से दिन में तीन बार हिलाएं। जीवामृत का छिड़काव करके या सिंचाई के पानी के माध्यम से मिट्टी में मिला कर इसका उपयोग किया जाता है। तीन बार इस घोल को उपयोग करने की  जरूरत है एक बुवाई से पहले, दूसरा बुवाई के बीस दिन बाद और तीसरा बुवाई के 45 दिन बाद। इस प्रकार यदि किसान इस घोल को प्रयोग करते है तो फसल की ऊपज में इजाफा होता है।  Merikheti.com का मुख्य उद्देश्य किसानों की बेहतरी है। इसलिए प्रत्येक माह किसान मासिक पंचायत का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन से किसानों को कृषि से संबंधित बहुत-सी महत्त्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं। उनको फसलों के उत्तम चयन व फसलों की देखभाल किस प्रकार करें आदि आवश्यक पहलुओं के बारे में बेहद गहनता से बताया जाता है। किसान इस मासिक पंचायत में बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी लेते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान प्रदान किया जाता है। मासिक किसान पंचायत के अंतर्गत वैज्ञानिकों से सवाल पूछने वाले किसानों को पुरुस्कृत किया जाता है।
इस राज्य सरकार ने आल इन वन तरह का कृषि ऐप जारी कर किसानों का किया फायदा

इस राज्य सरकार ने आल इन वन तरह का कृषि ऐप जारी कर किसानों का किया फायदा

आधुनिक युग में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कृषि योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने अथवा आवेदन के लिए किसान भाईयों को ई-मित्र केंद्र अथवा कृषि विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। क्योंकि, राजस्थान में खेती-किसानी करने वालों के लिए राज किसान एप पर ऐसी विभिन्न सुविधाएं मुहैय्या कराई गई हैं। सीधी सी बात है, अगर कृषि क्षेत्र की प्रगति एवं विकास-विस्तार होगा तो किसान भी की उन्नत और खुशहाल होंगे। सरकार इसको बरकरार रखने के लिए किसानों की निरंतर रूप से हर संभव सहायता करती है। इसलिए किसानों के हित में विभिन्न कृषि योजनाएं भी चलाई जाती हैं, जिसके माध्यम से बीमा, लोन एवं अनुदान आदि का फायदा प्राप्त होता है। इन योजनाओं से जुड़कर किसान भाई अपने आर्थिक हालातों को अच्छा कर सकते हैं। परंतु, कृषि योजनाओं के विषय में जानकारी इकट्ठी करना एवं आवेदन करना किसान भाइयों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। बहुत बार किसानों को कृषि विभाग से लेके ग्राम पंचायत कार्यालय के चक्कर तक काटने पड़ते हैं। इन सभी स्थितियों से किसानों को छुटकारा दिलाने के लिए फिलहाल राज्य सरकारें मोबाइल एप्लीकेशन जारी कर रही हैं। इसी कड़ी में राजस्थान सरकार की तरफ से भी राज किसान एप्लीकेशन जारी किया गया है।

केवल एक क्लिक से मिलेगी सभी योजनाओं की जानकारी

राजस्थान सरकार की तरफ से प्रदेश के किसानों के लिए राज किसान एप्लीकेशन जारी किया गया है। इसके अंतर्गत कृषि विभाग से लेकर बागवानी एवं पशुपालन विभाग की नई-पुरानी समस्त योजनाओं की जानकारी चढ़ा दी जाती है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज किसान एप पर स्व-पंजीकरण का विकल्प दिया गया है। मललब कि फिलहाल किसान भाई अपना पंजीकरण करके सीधे कृषि योजनाओं हेतु आवेदन कर सकते हैं।

क्षतिग्रस्त फसल की शिकायत भी यहीं दर्ज होगी

राज किसान साथी पोर्टल को पूर्णतया किसानों के हिसाब से बनाया गया है। इसमें फसल बीमा क्लेम से लेकर ब्याज की जानकारी, ऑनलाइन अदायगी के साथ फसल क्षति की शिकायत भी दर्ज करवाई जा सकती हैं। यह भी पढ़ें: जानें भारत विश्व में फसल बीमा क्लेम दर के मामले में कौन-से स्थान पर है इन समस्त कार्यों हेतु कृषि विभाग द्वारा राज किसान एप पर फसल बीमा का कॉलम भी बनाया गया है। एक ही प्लेटफॉर्म पर यह समस्त सुविधाएं प्राप्त होने से ना केवल किसान का वक्त बचेगा, साथ ही, पैसे की भी बचत होगी।

कृषि से संबंधित सेवाओं की जानकारी प्रदान की गई हैं

राजस्थान के किसान केवल खेती-किसानी तक ही सीमित नहीं रहे हैं। साथ ही, दूसरी गतिविधियों से भी जुड़कर अच्छी आय कर रहे हैं। इसके लिए राज किसान साथी एप पर एग्री मशीनरी की बुकिंग, कीट-रोग प्रबंधन की जानकारी, उन्नत कृषि तकनीक, मिट्टी और पानी की जांच के लिए नजदीकी लैब, एग्रीकल्चर एंड प्रोसेसिंग, कृषि कार्यों की वीडिया, खाद्य उत्पादक और निर्यातकों की लिस्ट-मोबाइल नंबर, मशीनों की खरीद या किराए पर उठाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर्स की जानकारी, खाद उर्वरक व कीटनाशक विक्रेताओं की सूची एवं इसके उपयोग करने के तरीके की भी एप पर जानकारी दी गई है।